चोर–चोर मौसेरे भाई! आज की राजनीति बनी स्वार्थ की मंडी, बेरोजगार युवा हाशिये पर, नेता ऐशो-आराम में मग्न!

रायगढ़ :-आज की राजनीति जनता की सेवा का माध्यम कम और निजी स्वार्थ, वंशवाद और दिखावे का अखाड़ा अधिक बनती जा रही है। “चोर–चोर मौसेरे भाई” की कहावत आज के नेताओं पर पूरी तरह सटीक बैठती है, जहां सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—अधिकांश नेता केवल राजनीति की रोटी सेकने में लगे हैं। कोई अपने परिवार की वंशवादी राजनीति को बचाने में जुटा है तो कोई खुद को चमकाने और सुर्खियों में बने रहने के लिए जनता की समस्याओं को दरकिनार कर रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति देश और प्रदेश के बेरोजगार युवाओं की है। गांव-गांव में हजारों युवा डिग्रियां लेकर हाथ में फाइल और मन में उम्मीद लिए भटक रहे हैं, लेकिन न तो उनके लिए ठोस रोजगार नीति है और न ही किसी प्रकार की गंभीर स्किल डेवलपमेंट योजना जमीन पर दिखाई देती है। सरकारें योजनाओं के नाम पर आंकड़े जरूर गिनाती हैं, लेकिन आज तक यह तक नहीं पता कि वास्तव में कितने युवा बेरोजगार हैं, क्योंकि न तो ईमानदारी से गणना की जा रही है और न ही उनकी वास्तविक जरूरतों को समझा जा रहा है।
नेताओं की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं। आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है, वहीं जनप्रतिनिधि अपनी लग्जरी गाड़ियों को बदलने, बंगले सजाने और सत्ता की कुर्सी बचाने की चिंता में डूबे हुए हैं। विधानसभा और संसद में जनता के मुद्दों पर बहस के बजाय आरोप-प्रत्यारोप और निजी स्वार्थ की राजनीति हावी है।
गांवों में युवाओं के लिए न प्रशिक्षण केंद्र हैं, न उद्योगों से जोड़ने की ठोस पहल, न स्टार्टअप को प्रोत्साहन। नतीजा यह है कि युवा या तो शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं या फिर हताशा और अवसाद का शिकार हो रहे हैं।
आज जरूरत है ईमानदार राजनीति की, जहां सत्ता नहीं सेवा सर्वोपरि हो। यदि यही गंदी राजनीति यूं ही चलती रही, तो आने वाला समय न केवल युवाओं के लिए, बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी साबित होगा। जनता अब सब देख रही है, और बहुत जल्द इसका जवाब भी देगी।



