कुर्सी छोड़िए ज़मीन पर आइए! दिखावटी दौरों से नहीं, जवाबदेही से बनेगा पुसौर का विकास”!
रायगढ़ :-जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर ग्राम पंचायतों में निरीक्षण और दौरों की तस्वीरें जरूर सामने आती हैं, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है। ग्राम पंचायत बाघाडोला की तरह यदि जनपद पंचायत पुसौर के सभी ग्राम पंचायतों में विकास और स्वच्छता को लेकर सघन जनसंपर्क किया जाए, तो हालात बदलने में देर नहीं लगेगी। दुर्भाग्य यह है कि जिले के जवाबदार अधिकारी कुर्सी में बैठकर केवल आंकड़े पूरे करने में ही अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं।

तस्वीरों में जिला सीईओ, उपसंचालक, अतिरिक्त सीईओ, जनपद सीईओ पुसौर, मनरेगा अधिकारी सहित तमाम आला अधिकारी ऐसे गंभीर और आदर्श नजर आते हैं, मानो किसी बड़े मिशन पर निकले हों। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि ये दौरे विकास नहीं, केवल दिखावे तक सीमित रह गए हैं। न स्वच्छता की स्थायी व्यवस्था दिखती है, न रोजगार योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग, और न ही पंचायत स्तर पर पारदर्शिता।
यदि अधिकारी सच में ईमानदारी से गांवों में उतरें, ग्रामीणों से संवाद करें, स्वच्छता अभियान की नियमित निगरानी करें और मनरेगा सहित अन्य योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन करें, तो जनपद पंचायत पुसौर की हर ग्राम पंचायत आदर्श ग्राम बन सकती है। मगर अफसोस, प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी साफ झलकती है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जनपद सीईओ पुसौर विवेक गोस्वामी को आज भी जनसूचना अधिकार (RTI) जैसे संवैधानिक कानून का सही पालन कराना पड़ रहा है। सवाल यह उठता है कि जब सूचना देने में ही अधिकारी असहज हों, तो पारदर्शी शासन की उम्मीद कैसे की जाए?
अब समय आ गया है कि जिला सीईओ पहले अपने अधीनस्थ अधिकारियों को RTI का सम्मान, नियमित दौरा और जनता से जवाबदेही का पाठ पढ़ाएं। वरना ऐसे दिखावटी निरीक्षण और फोटो सेशन से न गांव बदलेगा, न व्यवस्था। जनता सब देख रही है—और अब जवाब भी



