चाचा सत्ता-शासन” के सहारे रेत माफिया बेलगाम! खरसिया के डुमरपाली मांड नदी मे फोकलेन–हाइवा से खुलेआम लूट, कानून मौन?


खरसिया विधानसभा क्षेत्र के डुमरपाली मांड नदी मे अवैध रेत खनन का खेल जिस बेखौफ अंदाज़ में चल रहा है, उसने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के बीच अब यह चर्चा आम है कि यह सब किसी “चाचा सत्ता-शासन” के आशीर्वाद से हो रहा है। यही वजह है कि माफिया न दिन देखता है, न रात—नदी का सीना छलनी कर फोकलेन और हाइवा से रेत की लूट जारी है।
हैरानी की बात यह है कि एक सशक्त कार्यकर्ता खुलेआम यह दावा करता है—“मेरे चाचा का आशीर्वाद है, मौका मिला है तो रेत निकाल रहे हैं। फोकलेन मेरा है, हाइवा भी मेरा है।” यह बयान सिर्फ घमंड नहीं, बल्कि कानून और व्यवस्था को खुली चुनौती है। सवाल उठता है कि जब माफिया सरकार का रौब दिखाकर काम करे, तो आम नागरिक किससे न्याय की उम्मीद करे?
यहाँ “नेता चोर-चोर मौसेरे भाई” वाली कहावत सटीक बैठती दिख रही है। पक्ष-विपक्ष की राजनीति से परे, काली कमाई में सब बराबर—ऐसी धारणा आम होती जा रही है। बोट लेने से पहले पक्ष-विपक्ष तय करने की मजबूरी और बाद में हिस्सेदारी की अफवाहें बताती हैं कि अवैध खनन का नेटवर्क कितना गहरा है।
नदियों का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी संदेह को और पुख्ता करती है। क्या यह चुप्पी मिलीभगत का संकेत है? या फिर “चाचा सत्ता-शासन” के आगे सब बेबस हैं?
अब सवाल सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और कानून के सम्मान का है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो खरसिया में रेत माफिया का यह खेल और बेलगाम होगा। जनता पूछ रही है—कब टूटेगा यह सत्ता-संरक्षण? कब होगी निष्पक्ष जांच, और कब सजा मिलेगी उन लोगों को जो नदी, नियम और नैतिकता—तीनों को लूट रहे हैं?



