सूचना अधिकार से भाग रही पुसौर जनपद? RTI को घुमाकर छिपाया जा रहा ‘बिहान’ का बड़ा भ्रष्टाचार!

रायगढ़ :- जनपद पंचायत पुसौर में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ और वर्तमान सीईओ के संरक्षण में बीपीएम एवं कुछ आला अधिकारी मिलकर ‘बिहान’ योजना में हुए कथित भारी भ्रष्टाचार को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी आवेदक को स्पष्ट रूप से देने के बजाय लगातार भ्रमित किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, आवेदक द्वारा ‘बिहान’ योजना से संबंधित वित्तीय लेन-देन, स्वीकृत राशि, भुगतान विवरण और क्रियान्वयन से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई थी। लेकिन जनपद पंचायत पुसौर में कभी अपूर्ण जवाब, कभी विषयांतर सूचना और कभी तकनीकी बहाने बनाकर आरटीआई का जवाब टालने की कोशिश की जा रही है। यह न केवल सूचना के अधिकार कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी विषय पर जिले के अन्य जनपद पंचायत क्षेत्रों में पदस्थ सीईओ द्वारा ‘बिहान’ योजना से जुड़ी जानकारी बिना किसी टालमटोल के उपलब्ध कराई गई है। जब अन्य जनपद पंचायतों में सूचना दी जा सकती है, तो पुसौर जनपद पंचायत में ही जानकारी छिपाने की मजबूरी क्यों? यही प्रश्न अब आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस स्थिति से यह शंका और भी गहरी हो जाती है कि जनपद पंचायत पुसौर में ‘बिहान’ योजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, जिन्हें उजागर होने से बचाने के लिए आरटीआई को हथियार बनाकर उलझाया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि वास्तव में कोई गड़बड़ी नहीं है, तो सूचना देने से परहेज क्यों?
अब निगाहें जिला प्रशासन और उच्च स्तरीय अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर ‘बिहान’ योजना में हुए कथित भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।



