डुमरपाली से जिंदल तक अवैध रेत का साम्राज्य! ‘चाचा’ के संरक्षण में लाखों टन बालू की लूट, प्रशासन मौन क्यों?

राबर्टसन :-खरसिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम डुमरपाली से जिंदल संयंत्र तक अवैध रेत परिवहन की चर्चाएं अब तेज़ हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से जो बातें सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। कहा जा रहा है कि लाखों टन अवैध रेत पहुंचाने का ठेका शासन-सत्ता से जुड़े एक प्रभावशाली नेता, जिसे क्षेत्र में “चाचा” के नाम से जाना जाता है,कि संरक्षण में चल रहा है। सवाल यह है कि आखिर यह “चाचा” कौन है, जो अवैध रेत खनन को बालू की तरह पैसा कमाने का जरिया बनाए बैठा है?
सबसे सनसनीखेज दावा तो यह है कि खुद “चाचा” के भतीजे द्वारा खुलेआम यह कहा जा रहा है कि अवैध रेत खनन के पूरे खेल का वह मास्टर माइंड है। यही नहीं, उसने यह भी स्वीकार किया कि इस अवैध कारोबार को उसने एक ही जगह नहीं, बल्कि “दूसरे साइड” में भी बड़े स्तर पर अंजाम दिया है। यदि ये दावे सही हैं, तो यह साफ संकेत करता है कि अवैध रेत का यह कारोबार संगठित, सुनियोजित और राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है।
डुमरपाली क्षेत्र में मांड नदी और आसपास के इलाकों से रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। भारी मशीनों, हाइवा और ट्रैक्टरों के जरिए दिन-रात रेत निकाली जा रही है और बिना रॉयल्टी, बिना अनुमति यह रेत जिंदल जैसे बड़े औद्योगिक घरानों तक पहुंचाई जा रही है—ऐसी चर्चा आम है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस खेल पर खरसिया एसडीएम, तहसीलदार और खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
क्या यह संभव है कि लाखों टन अवैध रेत का परिवहन प्रशासन की जानकारी के बिना हो रहा हो? या फिर यह सब कुछ अधिकारियों की सहमति और मिलीभगत से चल रहा है? यदि समय रहते इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो डुमरपाली का यह अवैध रेत कारोबार न केवल पर्यावरण को तबाह करेगा, बल्कि शासन-प्रशासन की साख पर भी गहरा दाग छोड़ जाएगा। अब जनता पूछ रही है—“चाचा” कब बेनकाब होंगे और कार्रवाई कब होगी?



