टी.एस. बाबा बनें प्रदेश अध्यक्ष तो कांग्रेस को मिलेगी नई धार, कार्यकर्ताओं में लौटेगा आत्मविश्वास?

रायपुर :- छत्तीसगढ़ कांग्रेस की प्रदेश राजनीति इस समय निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। संगठन में नई ऊर्जा, स्पष्ट नेतृत्व और जमीनी पकड़ वाले चेहरे की ज़रूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। ऐसे में यदि टी.एस. बाबा को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो आने वाले समय में पार्टी को निश्चित तौर पर मजबूती मिल सकती है और कार्यकर्ताओं में खोया हुआ आत्मविश्वास लौट सकता है।
टी.एस.सिंहदेव बाबा को लेकर सबसे बड़ी बात यह है कि वे राजनीति में अपना स्वयं का दम-खम रखते हैं। वे न तो किसी के राजनीतिक बैसाखी पर चलते हैं और न ही किसी गुट की छाया में सिमटे रहते हैं। संगठन, सरकार और कार्यकर्ताओं—तीनों स्तरों पर उनकी पहचान एक सशक्त और स्पष्ट वक्ता नेता के रूप में है। यही कारण है कि कार्यकर्ता उन्हें गंभीरता से सुनते हैं और भरोसा करते हैं।
वहीं दूसरी ओर यदि विधायक उमेश पटेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो कांग्रेस की स्थिति में कोई ठोस मजबूती आती नहीं दिखती। उमेश पटेल का राजनीतिक कद अभी उस स्तर का नहीं है, जहाँ वे पूरे प्रदेश के संगठन को एकजुट कर सकें। वे एक सीमित क्षेत्र और सीमित प्रभाव तक ही सिमटे हुए नेता माने जाते हैं। ऐसे में संगठन को नई दिशा देने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर डालना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
कांग्रेस को इस समय ऐसे अध्यक्ष की आवश्यकता है जो सत्ता और संगठन के बीच सेतु बने, जो सरकार से सवाल पूछ सके और कार्यकर्ताओं की आवाज़ को शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचा सके। टी.एस. बाबा इस कसौटी पर खरे उतरते नज़र आते हैं। उनके नज़रों में दम है, उनके फैसलों में स्पष्टता है और उनकी राजनीति में आत्मनिर्भरता है।
यदि कांग्रेस को भविष्य में मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित होना है, तो प्रदेश अध्यक्ष के चयन में सिर्फ नाम नहीं, नियत और क्षमता को प्राथमिकता देनी होगी। टी.एस. बाबा इस भूमिका के लिए एक मजबूत दावेदार हैं—और यही कांग्रेस की असली ताकत बन सकती है।



